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ramayan 6.60.58: जम्हाई लेते समय कुंभकर्ण का पाताल-सा मुख मेरु पर्वत के शिखर पर उगते हुए सूर्य के समान प्रतीत हो रहा था। 58.   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.60.58 
तस्य जाजृम्भमाणस्य वक्त्रं पातालसंनिभम्।
ददृशे मेरुशृङ्गाग्रे दिवाकर इवोदित:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
जम्हाई लेते समय कुंभकर्ण का पाताल-सा मुख मेरु पर्वत के शिखर पर उगते हुए सूर्य के समान प्रतीत हो रहा था। 58.
 
While yawning, Kumbhakarna's underworld-like face looked like the sun rising on the peak of Mount Meru. 58.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)