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ramayan 6.60.56: पहाड़ की चोटियाँ और पेड़ उस पर टूट पड़े, फिर भी उसने उन भारी प्रहारों को कोई महत्व नहीं दिया। जब हाथियों के स्पर्श से उसकी नींद टूटी, तो वह भूख के डर से अचानक उछल पड़ा और लेट गया।   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  6.60.56 
स पात्यमानैर्गिरिशृङ्गवृक्षै-
रचिन्तयंस्तान् विपुलान् प्रहारान्।
निद्राक्षयात् क्षुद्भयपीडितश्च
विजृम्भमाण: सहसोत्पपात॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
पहाड़ की चोटियाँ और पेड़ उस पर टूट पड़े, फिर भी उसने उन भारी प्रहारों को कोई महत्व नहीं दिया। जब हाथियों के स्पर्श से उसकी नींद टूटी, तो वह भूख के डर से अचानक उछल पड़ा और लेट गया।
 
Though mountain peaks and trees were brought down upon him, he did not take those heavy blows as a matter of any consequence. When the elephants' touch broke his sleep, he suddenly jumped up, stretching himself out in fear of hunger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)