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ramayan 6.60.5: मैंने जो महान तप किया था, वह अवश्य ही व्यर्थ हो गया, क्योंकि आज मैं रावण, जो महेन्द्र के समान शक्तिशाली था, एक मनुष्य मात्र से पराजित हो गया।   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.60.5 
सर्वं तत् खलु मे मोघं यत् तप्तं परमं तप:।
यत् समानो महेन्द्रेण मानुषेण विनिर्जित:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
मैंने जो महान तप किया था, वह अवश्य ही व्यर्थ हो गया, क्योंकि आज मैं रावण, जो महेन्द्र के समान शक्तिशाली था, एक मनुष्य मात्र से पराजित हो गया।
 
The great penance that I had performed has certainly gone in vain, because today I, Ravana, who was as powerful as Mahendra, was defeated by a mere human being.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)