Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.60.49: इतना सब होने पर भी, श्राप के अधीन वह अत्यंत निद्राग्रस्त रात्रि प्राणी नहीं जागा। इससे वहाँ आए हुए सभी राक्षस क्रोधित हो गए।   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  6.60.49 
एवमप्यतिनिद्रस्तु यदा नैव प्रबुध्यते।
शापस्य वशमापन्नस्तत: क्रुद्धा निशाचरा:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
इतना सब होने पर भी, श्राप के अधीन वह अत्यंत निद्राग्रस्त रात्रि प्राणी नहीं जागा। इससे वहाँ आए हुए सभी राक्षस क्रोधित हो गए।
 
Even after all this, the extremely sleepy night creature, who was under the curse, did not wake up. This enraged all the demons who had come there. 49.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)