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ramayan 6.60.38: शंख, तुरही और नगाड़े बजने लगे। ताली, गर्जना और दहाड़ की ध्वनियाँ सर्वत्र गूँज उठीं। उस कोलाहलपूर्ण ध्वनि को सुनकर पक्षी चारों दिशाओं में दौड़ने लगे और आकाश में उड़ने लगे। उड़ते-उड़ते वे अचानक धरती पर गिर पड़ते। 38।   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.60.38 
सशङ्खभेरीपणवप्रणादं
सास्फोटितक्ष्वेलितसिंहनादम्।
दिशो द्रवन्तस्त्रिदिवं किरन्त:
श्रुत्वा विहंगा: सहसा निपेतु:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
शंख, तुरही और नगाड़े बजने लगे। ताली, गर्जना और दहाड़ की ध्वनियाँ सर्वत्र गूँज उठीं। उस कोलाहलपूर्ण ध्वनि को सुनकर पक्षी चारों दिशाओं में दौड़ने लगे और आकाश में उड़ने लगे। उड़ते-उड़ते वे अचानक धरती पर गिर पड़ते। 38।
 
The conches, trumpets and drums started sounding. The sounds of clapping, roaring and roaring echoed everywhere. Hearing that tumultuous sound, the birds started running in all directions and flying in the sky. While flying, they would suddenly fall down on the earth. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)