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ramayan 6.60.30: उसकी भुजाओं में चूड़ियाँ शोभायमान थीं। सिर पर सुशोभित मुकुट के कारण वह सूर्यदेव के समान प्रभा से प्रकाशित हो रहा था। इस रूप में उन दैत्यों ने रात्रि के श्रेष्ठ शत्रु-विनाशक कुम्भकर्ण को देखा।   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.60.30 
काञ्चनाङ्गदनद्धाङ्गं किरीटेनार्कवर्चसम्।
ददृशुर्नैर्ऋतव्याघ्रं कुम्भकर्णमरिंदमम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
उसकी भुजाओं में चूड़ियाँ शोभायमान थीं। सिर पर सुशोभित मुकुट के कारण वह सूर्यदेव के समान प्रभा से प्रकाशित हो रहा था। इस रूप में उन दैत्यों ने रात्रि के श्रेष्ठ शत्रु-विनाशक कुम्भकर्ण को देखा।
 
Bangle bands looked good on his arms. Due to the illustrious crown on his head, he was glowing with the radiance like the Sun God. In this form, those demons saw Kumbhakarna, the best enemy-destroyer of the night.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)