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ramayan 6.60.26: गुफा का फर्श बहुमूल्य रत्नों और स्वर्ण से जड़ा हुआ था, जिससे वह अत्यंत सुन्दर लग रही थी। उसमें प्रवेश करके उन महादैत्यों ने देखा कि वहाँ भयंकर एवं शक्तिशाली कुंभकर्ण सो रहा है।   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.60.26 
तां प्रविश्य गुहां रम्यां रत्नकाञ्चनकुट्टिमाम्।
ददृशुर्नैर्ऋतव्याघ्रा: शयानं भीमविक्रमम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
गुफा का फर्श बहुमूल्य रत्नों और स्वर्ण से जड़ा हुआ था, जिससे वह अत्यंत सुन्दर लग रही थी। उसमें प्रवेश करके उन महादैत्यों ने देखा कि वहाँ भयंकर एवं शक्तिशाली कुंभकर्ण सो रहा है।
 
The floor of the cave was studded with precious stones and gold, which made it very beautiful. Entering it, those great demons saw that the fearsome and powerful Kumbhakarna was sleeping there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)