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ramayan 6.60.24-25: कुंभकर्ण एक गुफा में रहता था जो अत्यंत सुंदर थी और जिसका वातावरण फूलों की सुगंध से भरा हुआ था। उसकी लंबाई-चौड़ाई चारों ओर एक योजन थी और उसका द्वार बहुत बड़ा था। जैसे ही वे उसमें प्रवेश करते, कुंभकर्ण की श्वास के बल से वह महाबली राक्षस अचानक पीछे हट जाता। फिर बड़ी कठिनाई से वे अपने पैर जमाकर गुफा में प्रवेश कर जाते।   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  6.60.24-25 
तां प्रविश्य महाद्वारां सर्वतो योजनायताम्।
कुम्भकर्णगुहां रम्यां पुष्पगन्धप्रवाहिनीम्॥ २४॥
कुम्भकर्णस्य नि:श्वासादवधूता महाबला:।
प्रतिष्ठमाना: कृच्छ्रेण यत्नात् प्रविविशुर्गुहाम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
कुंभकर्ण एक गुफा में रहता था जो अत्यंत सुंदर थी और जिसका वातावरण फूलों की सुगंध से भरा हुआ था। उसकी लंबाई-चौड़ाई चारों ओर एक योजन थी और उसका द्वार बहुत बड़ा था। जैसे ही वे उसमें प्रवेश करते, कुंभकर्ण की श्वास के बल से वह महाबली राक्षस अचानक पीछे हट जाता। फिर बड़ी कठिनाई से वे अपने पैर जमाकर गुफा में प्रवेश कर जाते।
 
Kumbhakarna lived in a cave which was very beautiful and the atmosphere was filled with the fragrance of flowers. Its length and breadth were one yojana on all sides and its door was very large. As soon as they entered it, the mighty demon was suddenly pushed back by the force of Kumbhakarna's breath. Then, with great difficulty, they managed to keep their feet and entered the cave with great effort.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)