Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.60.21: यदि इस घोर संकट के समय भी कुंभकर्ण मेरी सहायता करने में समर्थ नहीं है, तो वह इंद्र के समान शक्तिशाली होने पर भी मेरे किस काम का - मैं उसका क्या करूँ?॥ 21॥   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.60.21 
किं करिष्याम्यहं तेन शक्रतुल्यबलेन हि।
ईदृशे व्यसने घोरे यो न साह्याय कल्पते॥ २१॥
 
 
अनुवाद
यदि इस घोर संकट के समय भी कुंभकर्ण मेरी सहायता करने में समर्थ नहीं है, तो वह इंद्र के समान शक्तिशाली होने पर भी मेरे किस काम का - मैं उसका क्या करूँ?॥ 21॥
 
If Kumbhakarna is not able to help me even in this time of grave crisis, then what is the use of him to me even though he is as powerful as Indra - what will I do with him?'॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)