Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.60.19: ‘यह समस्त राक्षसों में प्रधान कुम्भकर्ण रणभूमि में हमारे लिए उत्तम विजय के समान है; परंतु खेद की बात है कि वह मूर्ख ग्राम्य सुख में मग्न रहता है और सदैव सोता रहता है।’ 19॥ | ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘यह समस्त राक्षसों में प्रधान कुम्भकर्ण रणभूमि में हमारे लिए उत्तम विजय के समान है; परंतु खेद की बात है कि वह मूर्ख ग्राम्य सुख में मग्न रहता है और सदैव सोता रहता है।’ 19॥
‘This Kumbhakarna, the chief among all the demons, is like the best victory for us in the battlefield; But it is a matter of regret that that fool remains engrossed in rural happiness and always sleeps. 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥