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ramayan 6.60.14-16h: 'प्रहस्त मारा गया है और मैं भी युद्ध में पराजित हो गया हूँ', यह जानकर महाबली रावण ने राक्षसों की भयंकर सेना को आदेश दिया कि 'तुम सब लोग नगर के द्वार पर रहकर उनकी रक्षा करने का प्रयत्न करो। प्राचीर पर भी चढ़ जाओ और गहरी नींद में सोए हुए कुम्भकर्ण को जगा दो।॥14-15 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 14-16h
 
 
श्लोक  6.60.14-16h 
समरे जितमात्मानं प्रहस्तं च निषूदितम्॥ १४॥
ज्ञात्वा रक्षोबलं भीममादिदेश महाबल:।
द्वारेषु यत्न: क्रियतां प्राकारश्चाधिरुह्यताम्॥ १५॥
निद्रावशसमाविष्ट: कुम्भकर्णो विबोध्यताम्।
 
 
अनुवाद
'प्रहस्त मारा गया है और मैं भी युद्ध में पराजित हो गया हूँ', यह जानकर महाबली रावण ने राक्षसों की भयंकर सेना को आदेश दिया कि 'तुम सब लोग नगर के द्वार पर रहकर उनकी रक्षा करने का प्रयत्न करो। प्राचीर पर भी चढ़ जाओ और गहरी नींद में सोए हुए कुम्भकर्ण को जगा दो।॥14-15 1/2॥
 
Knowing that 'Prahasta has been killed and I too have been defeated in the battle', the mighty Ravana ordered the fearsome army of demons that 'You all stay at the gates of the city and try to protect them. Climb the ramparts as well and wake up Kumbhakarna who was fast asleep.॥ 14-15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)