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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 60: अपनी पराजय से दुःखी रावण की आज्ञा से सोये कुम्भकर्ण का जगाया जाना और उसे देखकर वानरों का भयभीत होना  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  6.60.12-13h 
एतदेव समागम्य यत्नं कर्तुमिहार्हथ॥ १२॥
राक्षसाश्चापि तिष्ठन्तु चर्यागोपुरमूर्धसु।
 
 
अनुवाद
इन श्रापों ने मेरे लिए भय और संकट उत्पन्न कर दिया है। अब जब आप यह जान गए हैं, तो आप सभी को इस आसन्न संकट को टालने का प्रयास करना चाहिए। राक्षसों को राजमार्गों और गोपुरों की चोटियों पर उनकी रक्षा के लिए खड़ा होना चाहिए।
 
These curses have caused fear and danger to me. Now that you know this, you all should try to avert the impending danger. The demons should stand on the highways and the tops of the gopuras to protect them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)