Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.59.95: लक्ष्मण के शब्द गंभीर स्वर में थे और उनके धनुष की टंकार भी भयानक टंकार कर रही थी। यह सुनकर राक्षसराज रावण युद्ध के लिए आये सुमित्रापुत्र के पास गया और क्रोधित होकर बोला - | ramayan सर्ग 6.59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तस्य वाक्यं प्रतिपूर्णघोषं
ज्याशब्दमुग्रं च निशम्य राजा।
आसाद्य सौमित्रिमुपस्थितं तं
रोषान्वितं वाचमुवाच रक्ष:॥ ९५॥
अनुवाद
लक्ष्मण के शब्द गंभीर स्वर में थे और उनके धनुष की टंकार भी भयानक टंकार कर रही थी। यह सुनकर राक्षसराज रावण युद्ध के लिए आये सुमित्रापुत्र के पास गया और क्रोधित होकर बोला -
Lakshman's words were deep in tone and his bowstring was also making a terrifying twang. On hearing this, the king of demons Ravana went near Sumitra's son who had arrived for the war and said angrily -
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥