श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  6.59.90 
सोऽस्त्रमुक्तेन बाणेन नीलो वक्षसि ताडित:।
निर्दह्यमान: सहसा स पपात महीतले॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
उसके धनुष से छूटा हुआ बाण नील की छाती में लगा और उसकी ज्वाला से जलकर वह सहसा भूमि पर गिर पड़ा॥90॥
 
The arrow shot from his bow struck Neel's chest deeply. Burning with its flame, he suddenly fell to the ground.॥90॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)