श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 66-67h
 
 
श्लोक  6.59.66-67h 
सकृत् तु प्रहरेदानीं दुर्बुद्धे किं विकत्थसे॥ ६६॥
ततस्त्वां मामको मुष्टिर्नयिष्यति यमक्षयम्।
 
 
अनुवाद
‘अरे मूर्ख! अब मुझ पर एक बार और आक्रमण कर। तू क्यों बढ़ा-चढ़ाकर कह रहा है? तेरे आक्रमण के बाद जब मेरा मुक्का लगेगा, तब वह तुझे तुरन्त यमलोक पहुँचा देगा।’॥66॥
 
‘You fool! Now attack me once more. Why are you exaggerating? After your attack, when my punch lands, it will immediately send you to Yamaloka.’॥ 66॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)