श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  6.59.54 
रथं तस्य समासाद्य बाहुमुद्यम्य दक्षिणम्।
त्रासयन् रावणं धीमान् हनूमान् वाक्यमब्रवीत् ॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
अपने रथ पर पहुँचकर बुद्धिमान हनुमान्‌ने अपना दाहिना हाथ उठाकर रावण को भयभीत करके कहा -॥54॥
 
Reaching his chariot the intelligent Hanuman raised his right hand and frightened Ravana by saying -॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)