श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.59.13 
ततस्तु रामस्य निशम्य वाक्यं
विभीषण: शक्रसमानवीर्य:।
शशंस रामस्य बलप्रवेकं
महात्मनां राक्षसपुंगवानाम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
श्री राम के उपर्युक्त वचन सुनकर इन्द्र के समान पराक्रमी विभीषण ने महामनस्वी दैत्यों के बल और सैन्यबल का परिचय देते हुए उनसे कहा-॥13॥
 
On hearing the above words of Shri Rama, Vibhishana, who was as powerful as Indra, introduced the strength and military power of the great-minded demon chiefs and said to him -॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)