श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 59: प्रहस्त की मृत्यु से दुःखी रावण का युद्ध के लिये पधारना, लक्ष्मण का युद्ध में आना, श्रीराम से परास्त होकर रावण का लङ्का जाना  »  श्लोक 125-126h
 
 
श्लोक  6.59.125-126h 
तच्छ्रुत्वा राघवो वाक्यं वायुपुत्रेण भाषितम्॥ १२५॥
अथारुरोह सहसा हनूमन्तं महाकपिम्।
 
 
अनुवाद
पवनकुमार (हनुमानजी) के ये वचन सुनकर श्री रघुनाथजी सहसा ही महाकपि हनुमानजी की पीठ पर चढ़ गए। 125.
 
On hearing these words of Pavankumar (Lord Hanuman), Sri Raghunath suddenly climbed on the back of that great ape Hanuman. 125.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)