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ramayan 6.58.61: तदनन्तर विजयी सेनापति महाबली नील अपने महान् कार्य से प्रशंसित होकर श्री राम और लक्ष्मण से मिलने आया और अत्यन्त प्रसन्न हुआ॥61॥   |   ramayan सर्ग 6.58: नील के द्वारा प्रहस्त का वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 58: नील के द्वारा प्रहस्त का वध  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  6.58.61 
ततस्तु नीलो विजयी महाबल:
प्रशस्यमान: सुकृतेन कर्मणा।
समेत्य रामेण सलक्ष्मणेन
प्रहृष्टरूपस्तु बभूव यूथप:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर विजयी सेनापति महाबली नील अपने महान् कार्य से प्रशंसित होकर श्री राम और लक्ष्मण से मिलने आया और अत्यन्त प्रसन्न हुआ॥61॥
 
Thereafter, the victorious commander, mighty Neel, being praised for his great deed, came and met Shri Ram and Lakshman and started feeling very happy. 61॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डेऽष्टपञ्चाश: सर्ग: ॥ ५ ८॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें अट्ठावनवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ५ ८॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)