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ramayan 6.58.55: उसके प्राण निकल गए। उसका तेज, बल और उसकी सारी इन्द्रियाँ चली गईं। वह राक्षस जड़ से कटे वृक्ष के समान सहसा भूमि पर गिर पड़ा ॥55॥   |   ramayan सर्ग 6.58: नील के द्वारा प्रहस्त का वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.58.55 
स गतासुर्गतश्रीको गतसत्त्वो गतेन्द्रिय:।
पपात सहसा भूमौ छिन्नमूल इव द्रुम:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
उसके प्राण निकल गए। उसका तेज, बल और उसकी सारी इन्द्रियाँ चली गईं। वह राक्षस जड़ से कटे वृक्ष के समान सहसा भूमि पर गिर पड़ा ॥55॥
 
His soul departed. His radiance, his strength and all his senses were gone. That demon suddenly fell to the ground like a tree cut from its roots. ॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)