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श्लोक  6.58.50 
तत: शोणितदिग्धाङ्ग: प्रगृह्य च महातरुम्।
प्रहस्तस्योरसि क्रुद्धो विससर्ज महाकपि:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
उसके सारे अंग रक्त से लथपथ हो गए। तब क्रोध से भरे हुए महाकपि नील ने एक विशाल वृक्ष उठाकर प्रहस्त की छाती पर दे मारा।
 
All his limbs were soaked in blood. Then the great ape Neel, filled with rage, picked up a huge tree and threw it on Prahasta's chest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)