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ramayan 6.58.37-38h: वे अत्यन्त शक्तिशाली बाण क्रुद्ध सर्पों के समान नील नदी तक पहुँचे और उसे भेदकर सावधानीपूर्वक पृथ्वी में समा गए।   |   ramayan सर्ग 6.58: नील के द्वारा प्रहस्त का वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 58: नील के द्वारा प्रहस्त का वध  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  6.58.37-38h 
ते प्राप्य विशिखा नीलं विनिर्भिद्य समाहिता:॥ ३७॥
महीं जग्मुर्महावेगा रोषिता इव पन्नगा:।
 
 
अनुवाद
वे अत्यन्त शक्तिशाली बाण क्रुद्ध सर्पों के समान नील नदी तक पहुँचे और उसे भेदकर सावधानीपूर्वक पृथ्वी में समा गए।
 
Like furious serpents, those extremely powerful arrows reached the Neel and, after piercing it, carefully entered the earth. 37 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)