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ramayan 6.58.35-36h: फिर जैसे प्रचण्ड वायु आकाश में स्थित विशाल बादलों को उड़ा ले जाती है, वैसे ही नील भी बलपूर्वक राक्षस सेना का संहार करने लगा। इससे व्याकुल होकर राक्षस सेना युद्धभूमि से भाग खड़ी हुई। सेनापति प्रहस्त ने जब अपनी सेना की यह दुर्दशा देखी, तो उसने सूर्य के समान तेजस्वी अपने रथ से नील पर आक्रमण किया।   |   ramayan सर्ग 6.58: नील के द्वारा प्रहस्त का वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 58: नील के द्वारा प्रहस्त का वध  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  6.58.35-36h 
उद्‍धूत इव वायु: खे महदभ्रबलं बलात्।
समीक्ष्याभिद्रुतं युद्धे प्रहस्तो वाहिनीपति:॥ ३५॥
रथेनादित्यवर्णेन नीलमेवाभिदुद्रुवे।
 
 
अनुवाद
फिर जैसे प्रचण्ड वायु आकाश में स्थित विशाल बादलों को उड़ा ले जाती है, वैसे ही नील भी बलपूर्वक राक्षस सेना का संहार करने लगा। इससे व्याकुल होकर राक्षस सेना युद्धभूमि से भाग खड़ी हुई। सेनापति प्रहस्त ने जब अपनी सेना की यह दुर्दशा देखी, तो उसने सूर्य के समान तेजस्वी अपने रथ से नील पर आक्रमण किया।
 
Then just as a strong wind blows away the huge clouds in the sky, Neel too started killing the demon army with force. Due to this, the demon army fled from the battlefield. When the commander Prahast saw the plight of his army, he attacked Neel with his chariot which was as bright as the sun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)