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ramayan 6.58.17: कोई तो पीड़ा से चिल्ला रहे थे, कोई सिंह के समान दहाड़ रहे थे। इस प्रकार वानरों और राक्षसों का भयंकर कोलाहल सर्वत्र गूंज रहा था॥17॥   |   ramayan सर्ग 6.58: नील के द्वारा प्रहस्त का वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 58: नील के द्वारा प्रहस्त का वध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.58.17 
आर्तस्वनं च स्वनतां सिंहनादं च नर्दताम्।
बभूव तुमुल: शब्दो हरीणां रक्षसामपि॥ १७॥
 
 
अनुवाद
कोई तो पीड़ा से चिल्ला रहे थे, कोई सिंह के समान दहाड़ रहे थे। इस प्रकार वानरों और राक्षसों का भयंकर कोलाहल सर्वत्र गूंज रहा था॥17॥
 
Some were crying in pain while others were roaring like lions. In this way the terrible uproar of the monkeys and demons echoed everywhere.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)