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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 58: नील के द्वारा प्रहस्त का वध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.58.15 
वानरैश्चापि संक्रुद्धै राक्षसौघा: समन्तत:।
पादपैर्गिरिशृङ्गैश्च सम्पिष्टा वसुधातले॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार वानरों ने अत्यन्त क्रोधित होकर वृक्षों और पर्वत शिखरों की सहायता से पृथ्वी के चारों ओर राक्षसों के समूहों को कुचल डाला ॥15॥
 
In the same way, the monkeys, being very angry, crushed hordes of demons on all sides of the earth with the help of trees and mountain peaks. ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)