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ramayan 6.57.5: हे वीर योद्धा! शत्रु सेना ने नगर के बहुत निकट ही डेरा डाल दिया है, इसलिए सारा नगर सहसा संकट में पड़ गया है। अब मुझे इससे छुटकारा पाने का कोई और उपाय नहीं दिखाई देता।॥5॥   |   ramayan सर्ग 6.57: प्रहस्त का रावण की आज्ञा से विशाल सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 57: प्रहस्त का रावण की आज्ञा से विशाल सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.57.5 
पुरस्योपनिविष्टस्य सहसा पीडितस्य ह।
नान्ययुद्धात् प्रपश्यामि मोक्षं युद्धविशारद॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे वीर योद्धा! शत्रु सेना ने नगर के बहुत निकट ही डेरा डाल दिया है, इसलिए सारा नगर सहसा संकट में पड़ गया है। अब मुझे इससे छुटकारा पाने का कोई और उपाय नहीं दिखाई देता।॥5॥
 
O brave warrior! The enemy's army has camped very close to the city, that is why the entire city is suddenly in distress. Now I don't see any other way to get rid of it. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)