Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.57.15: 'परन्तु आपने तो मुझे सदैव दान, सम्मान और समय-समय पर अनेक प्रकार की सान्त्वनाओं से सम्मानित किया है। फिर मैं आपके हित के लिए कुछ क्यों न करूँ? (अथवा ऐसा कौन-सा कार्य है, जो मैं आपके हित के लिए न कर सकूँ) | ramayan सर्ग 6.57: प्रहस्त का रावण की आज्ञा से विशाल सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'परन्तु आपने तो मुझे सदैव दान, सम्मान और समय-समय पर अनेक प्रकार की सान्त्वनाओं से सम्मानित किया है। फिर मैं आपके हित के लिए कुछ क्यों न करूँ? (अथवा ऐसा कौन-सा कार्य है, जो मैं आपके हित के लिए न कर सकूँ)
‘But you have always honoured me with charity, respect and various consolations from time to time. Then why will I not do anything for your benefit? (or what work will I not be able to do for your benefit)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥