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ramayan 6.56.34: वे भयभीत होकर एक-दूसरे को कुचलते हुए भागे और लंकापुरी में प्रवेश कर गए। भागते समय वे बार-बार पीछे मुड़कर देखते रहे। 34.   |   ramayan सर्ग 6.56: हनुमान जी के द्वारा अकम्पन का वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 56: हनुमान जी के द्वारा अकम्पन का वध  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.56.34 
अन्योन्यं ये प्रमथ्नन्तो विविशुर्नगरं भयात्।
पृष्ठतस्ते तु सम्मूढा: प्रेक्षमाणा मुहुर्मुहु:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वे भयभीत होकर एक-दूसरे को कुचलते हुए भागे और लंकापुरी में प्रवेश कर गए। भागते समय वे बार-बार पीछे मुड़कर देखते रहे। 34.
 
Trampling each other in fear, they ran and entered Lankapuri. While running, they kept looking back again and again. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)