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ramayan 6.55.7-8h: उसी समय भयंकर राक्षसों से घिरा हुआ अकम्पन भी तपे हुए सोने से सुसज्जित विशाल रथ पर सवार होकर निकला। वह मेघ के समान विशाल था, उसका रंग मेघ के समान था और उसकी गर्जना मेघ के समान थी।   |   ramayan सर्ग 6.55: रावण की आज्ञा से अकम्पन आदि राक्षसों का युद्ध में आना और वानरों के साथ उनका घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.55.7-8h 
रथमास्थाय विपुलं तप्तकाञ्चनभूषणम्।
मेघाभो मेघवर्णश्च मेघस्वनमहास्वन:॥ ७॥
राक्षसै: संवृतो घोरैस्तदा निर्यात्यकम्पन:।
 
 
अनुवाद
उसी समय भयंकर राक्षसों से घिरा हुआ अकम्पन भी तपे हुए सोने से सुसज्जित विशाल रथ पर सवार होकर निकला। वह मेघ के समान विशाल था, उसका रंग मेघ के समान था और उसकी गर्जना मेघ के समान थी।
 
At the same time, Akampana also came out surrounded by fierce demons riding on a huge chariot decorated with heated gold. He was as big as a cloud, his colour was like that of a cloud and his roar was like that of a cloud. 7 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)