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श्लोक  6.54.20 
दृष्ट्वा पतन्तं तं वृक्षमसम्भ्रान्तश्च राक्षस:।
चिच्छेद बहुधा सोऽपि मथित: प्रापतद् भुवि॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उस वृक्ष को अपनी ओर आते देखकर भी वज्रदंष्ट्र घबराया नहीं। उसने उस वृक्ष पर बाण चलाकर उसके कई टुकड़े कर दिए। इस प्रकार वह वृक्ष टूटकर धरती पर गिर पड़ा।
 
Even after seeing that tree coming towards him, Vajradanshtra did not panic. He shot an arrow at that tree and broke it into many pieces. Thus, after being broken, that tree fell on the earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)