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ramayan 6.54.14-15h: महाबली वज्रदंष्ट्र अत्यंत क्रोध में भरकर प्रत्येक वार में पाँच, सात, आठ और नौ वानरों को घायल कर देता था। इस प्रकार वह वानर सैनिकों को भयंकर चोटें पहुँचाता था।   |   ramayan सर्ग 6.54: वज्रदंष्ट्र और अङ्गद का युद्ध तथा अङ्गद के हाथ से उस निशाचर का वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.54.14-15h 
बिभेद वानरांस्तत्र सप्ताष्टौ नव पञ्च च॥ १४॥
विव्याध परमक्रुद्धो वज्रदंष्ट्र: प्रतापवान्।
 
 
अनुवाद
महाबली वज्रदंष्ट्र अत्यंत क्रोध में भरकर प्रत्येक वार में पाँच, सात, आठ और नौ वानरों को घायल कर देता था। इस प्रकार वह वानर सैनिकों को भयंकर चोटें पहुँचाता था।
 
The mighty Vajradanshtra, filled with extreme anger, would injure five, seven, eight and nine monkeys with each attack. In this way he inflicted severe injuries on the monkey soldiers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)