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श्लोक  6.54.10 
कबन्धानि समुत्पेतुर्भीरूणां भीषणानि वै।
भुजपाणिशिरश्छिन्नाश्छिन्नकायाश्च भूतले॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ, जिनके सिर कटे थे, उनके शरीर चारों ओर उछलने लगे, जिससे डरपोक सैनिक भयभीत हो गए। योद्धाओं की कटी हुई भुजाएँ, हाथ, सिर और मध्य भाग भूमि पर पड़े थे।
 
There, the bodies of those whose heads had been cut off started tossing in all directions, frightening the timid soldiers. The severed arms, hands, heads and the middle parts of the warriors were lying on the ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)