Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.53.31-32h: योद्धाओं के हार, बाजूबंद, वस्त्र और शस्त्रों से सुसज्जित युद्धभूमि शरद ऋतु की रात्रि के समान सुन्दर लग रही थी।   |   ramayan सर्ग 6.53: वज्रदंष्ट्र का सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान, वानरों और राक्षसों का युद्ध, अङ्गद द्वारा राक्षसों का संहार   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 53: वज्रदंष्ट्र का सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान, वानरों और राक्षसों का युद्ध, अङ्गद द्वारा राक्षसों का संहार  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  6.53.31-32h 
हारकेयूरवस्त्रैश्च शस्त्रैश्च समलंकृता॥ ३१॥
भूमिर्भाति रणे तत्र शारदीव यथा निशा।
 
 
अनुवाद
योद्धाओं के हार, बाजूबंद, वस्त्र और शस्त्रों से सुसज्जित युद्धभूमि शरद ऋतु की रात्रि के समान सुन्दर लग रही थी।
 
The battlefield, adorned with the warriors' necklaces, armlets, clothes and weapons, looked as beautiful as an autumn night. 31 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)