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ramayan 6.53.25: उस समय वज्रदंष्ट्र अपने बाणों से वानरों को भयभीत करता हुआ युद्धभूमि में पाश धारण किये हुए यमराज के समान विचरण करने लगा, जो तीनों लोकों का विनाश करने के लिए उठे हों।   |   ramayan सर्ग 6.53: वज्रदंष्ट्र का सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान, वानरों और राक्षसों का युद्ध, अङ्गद द्वारा राक्षसों का संहार   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.53.25 
वज्रदंष्ट्रो भृशं बाणै रणे वित्रासयन् हरीन्।
चचार लोकसंहारे पाशहस्त इवान्तक:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
उस समय वज्रदंष्ट्र अपने बाणों से वानरों को भयभीत करता हुआ युद्धभूमि में पाश धारण किये हुए यमराज के समान विचरण करने लगा, जो तीनों लोकों का विनाश करने के लिए उठे हों।
 
At that time, Vajradanshtra, frightening the monkeys with his arrows, started roaming on the battlefield like Yamaraja holding a noose, who had risen to destroy the three worlds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)