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ramayan 6.53.14: अचानक मेघरहित आकाश से उल्काओं की भयंकर वर्षा होने लगी। भयंकर सियार मुँह से आग उगलते हुए बोलने लगे।   |   ramayan सर्ग 6.53: वज्रदंष्ट्र का सेना सहित युद्ध के लिये प्रस्थान, वानरों और राक्षसों का युद्ध, अङ्गद द्वारा राक्षसों का संहार   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.53.14 
आकाशाद् विघनात् तीव्रा उल्काश्चाभ्यपतंस्तदा।
वमन्त: पावकज्वाला: शिवा घोरा ववाशिरे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
अचानक मेघरहित आकाश से उल्काओं की भयंकर वर्षा होने लगी। भयंकर सियार मुँह से आग उगलते हुए बोलने लगे।
 
Suddenly, a terrible shower of meteors began from the cloudless sky. Terrible jackals began to speak while spitting fire from their mouths. 14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)