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श्लोक  6.53.10 
विचित्रवासस: सर्वे दीप्ता राक्षसपुङ्गवा:।
गजा महोत्कटा: शूराश्चलन्त इव पर्वता:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
विचित्र वेष धारण किए हुए समस्त राक्षस योद्धा अपनी तेजस्विता से चमक रहे थे। वीरता से परिपूर्ण और मदमस्त गजराज हिलते हुए पर्वत के समान जान पड़ते थे।
 
All the demon warriors wearing strange clothes were shining with their brilliance. Gajraj, full of bravery and intoxicated, looked like a moving mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)