|
| |
| |
श्लोक 6.51.36  |
तत: सुभीमो बहुभिर्निशाचरै-
र्वृतोऽभिनिष्क्रम्य रणोत्सुको बली।
ददर्श तां राघवबाहुपालितां
महौघकल्पां बहु वानरीं चमूम्॥ ३६॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| इस प्रकार बहुत से निशाचर प्राणियों से घिरा हुआ और युद्ध के लिए उद्यत भयंकर एवं बलवान दैत्य धूम्राक्ष ने नगर से बाहर आकर श्री रामचन्द्रजी के पराक्रम से सुरक्षित तथा प्रलयकाल के समुद्र के समान विशाल वानर सेना को देखा॥36॥ |
| |
| In this way, Dhumraksh, the fierce and powerful demon who was surrounded by a large number of nocturnal creatures and was eager for war, came out of the city and saw the huge monkey army, protected by the might of Shri Ramchandraji and like the ocean of doomsday. 36॥ |
| |
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे एकपञ्चाश: सर्ग: ॥ ५ १॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें इक्यावनवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ५ १॥ |
| |
| ✨ ai-generated |
| |
|