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ramayan 6.51.30-31h: गधों द्वारा जुते हुए तथा गधों की ध्वनि करते हुए उस उत्तम रथ पर बैठकर अत्यन्त भयंकर दिखने वाला राक्षस धूम्राक्ष युद्ध के लिए जा रहा था। आकाश में उड़ने वाले क्रूर पक्षी अशुभ वचन बोलकर उसे आगे बढ़ने से रोक रहे थे।   |   ramayan सर्ग 6.51: श्रीराम के बन्धनमुक्त होने का पता पाकर चिन्तित हए रावण का धूम्राक्ष को युद्ध के लिये भेजना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.51.30-31h 
रथप्रवरमास्थाय खरयुक्तं खरस्वनम्।
प्रयान्तं तु महाघोरं राक्षसं भीमदर्शनम्॥ ३०॥
अन्तरिक्षगता: क्रूरा: शकुना: प्रत्यषेधयन्।
 
 
अनुवाद
गधों द्वारा जुते हुए तथा गधों की ध्वनि करते हुए उस उत्तम रथ पर बैठकर अत्यन्त भयंकर दिखने वाला राक्षस धूम्राक्ष युद्ध के लिए जा रहा था। आकाश में उड़ने वाले क्रूर पक्षी अशुभ वचन बोलकर उसे आगे बढ़ने से रोक रहे थे।
 
While sitting on that excellent chariot drawn by donkeys and making the sound of donkeys, the extremely fearsome demon Dhoomraaksha, who looked very terrifying, was going for the war. The cruel birds flying in the sky spoke ominous words and prevented him from proceeding further.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)