श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 51: श्रीराम के बन्धनमुक्त होने का पता पाकर चिन्तित हए रावण का धूम्राक्ष को युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.51.23 
ते बद्धघण्टा बलिनो घोररूपा निशाचरा:।
विनद्यमाना: संहृष्टा धूम्राक्षं पर्यवारयन्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
वे भयंकर रूप वाले, बलवान और रात्रिचर पुरुष, घण्टा और प्रासा तथा शक्ति आदि अस्त्रों से सुसज्जित होकर हर्ष और उत्साह से भरे हुए, जोर से गर्जना करते हुए आए और धूम्राक्ष को घेरकर खड़े हो गए॥23॥
 
Those men of fearsome form, strong and nocturnal, armed with bells and weapons like prasa and shakti, came roaring loudly, full of joy and enthusiasm and stood surrounding Dhumraksha. 23॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas