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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 51: श्रीराम के बन्धनमुक्त होने का पता पाकर चिन्तित हए रावण का धूम्राक्ष को युद्ध के लिये भेजना
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श्लोक 14
श्लोक
6.51.14
तच्छ्रुत्वा वचनं तेषां राक्षसेन्द्रो महाबल:।
चिन्ताशोकसमाक्रान्तो विवर्णवदनोऽभवत्॥ १४॥
अनुवाद
उनके वचन सुनकर महाबली राक्षसराज रावण चिंता और शोक से व्याकुल हो गया और उसका मुख पीला पड़ गया॥14॥
Upon hearing his words, the mighty demon king Ravana was overcome with worry and grief, and his face turned pale.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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