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ramayan 6.51.12-13: (वे बोले-) ‘महाराज! जिन राम और लक्ष्मण भाइयों को कुमार इन्द्रजित ने रणभूमि में सर्परूपी बाणों से बाँधकर हाथ हिलाने में भी असमर्थ कर दिया था, वे दोनों भाई गजराज के समान वीर और पराक्रमी होकर बाणों के बन्धन से मुक्त होकर युद्धस्थल में खड़े दिखाई दे रहे हैं, जैसे हाथी अपनी रस्सी तोड़कर मुक्त हो जाता है॥12-13॥   |   ramayan सर्ग 6.51: श्रीराम के बन्धनमुक्त होने का पता पाकर चिन्तित हए रावण का धूम्राक्ष को युद्ध के लिये भेजना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 51: श्रीराम के बन्धनमुक्त होने का पता पाकर चिन्तित हए रावण का धूम्राक्ष को युद्ध के लिये भेजना  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  6.51.12-13 
यौ ताविन्द्रजिता युद्धे भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ।
निबद्धौ शरबन्धेन निष्प्रकम्पभुजौ कृतौ॥ १२॥
विमुक्तौ शरबन्धेन दृश्येते तौ रणाजिरे।
पाशानिव गजौ छित्त्वा गजेन्द्रसमविक्रमौ॥ १३॥
 
 
अनुवाद
(वे बोले-) ‘महाराज! जिन राम और लक्ष्मण भाइयों को कुमार इन्द्रजित ने रणभूमि में सर्परूपी बाणों से बाँधकर हाथ हिलाने में भी असमर्थ कर दिया था, वे दोनों भाई गजराज के समान वीर और पराक्रमी होकर बाणों के बन्धन से मुक्त होकर युद्धस्थल में खड़े दिखाई दे रहे हैं, जैसे हाथी अपनी रस्सी तोड़कर मुक्त हो जाता है॥12-13॥
 
(They said-) 'Maharaj! The brothers Ram and Lakshman, whom Kumar Indrajit had tied in the battlefield with snake-like arrows and made them incapable of even moving their hands, are seen standing in the battle arena, both brave and valiant like Gajraj, freed from the bondage of arrows, just like an elephant breaks its rope and becomes free. 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)