श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 50: विभीषण को इन्द्रजित समझकर वानरों का पलायन, गरुड़ का आना और श्रीराम लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त करके जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.50.8 
विभीषणं च सुग्रीवो दृष्ट्वा वानरभीषणम्।
ऋक्षराजं महात्मानं समीपस्थमुवाच ह॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वानरों को भयभीत करने वाले विभीषण को देखकर सुग्रीव ने अपने समीप खड़े महात्मा ऋक्षराज जाम्बवान से कहा- 8॥
 
Seeing Vibhishana, who frightened the monkeys, Sugriva said to Mahatma Riksharaj Jambavan who was standing near him - 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)