श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 50: विभीषण को इन्द्रजित समझकर वानरों का पलायन, गरुड़ का आना और श्रीराम लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त करके जाना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  6.50.53 
प्रकृत्या राक्षसा: सर्वे संग्रामे कूटयोधिन:।
शूराणां शुद्धभावानां भवतामार्जवं बलम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में स्वभावतः ही सभी राक्षस छलपूर्वक युद्ध करते हैं, परंतु आप जैसे शुद्ध भाव वाले योद्धाओं का बल सरलता ही है ॥ 53॥
 
All demons by nature fight deceitfully in battle, but the strength of warriors like you who have pure intentions is simplicity itself. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)