श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 50: विभीषण को इन्द्रजित समझकर वानरों का पलायन, गरुड़ का आना और श्रीराम लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त करके जाना  »  श्लोक 48-49
 
 
श्लोक  6.50.48-49 
मायाबलादिन्द्रजिता निर्मितं क्रूरकर्मणा॥ ४८॥
एते नागा: काद्रवेयास्तीक्ष्णदंष्ट्रा विषोल्बणा:।
रक्षोमायाप्रभावेण शरभूतास्त्वदाश्रया:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
क्रूर योद्धा इन्द्रजित ने माया के प्रभाव से जो सर्परूपी बाण तैयार किए थे, वे कद्रू के पुत्र थे। उनके दाँत बड़े तीखे हैं। इन सर्पों का विष बड़ा भयंकर है। राक्षसी की माया के प्रभाव से वे बाण बनकर आपके शरीर में चुभ गए। 48-49॥
 
The serpent-like arrows that the cruel warrior Indrajit had prepared with the help of Maya were the sons of the serpent Kadru. Their teeth are very sharp. The poison of these snakes is very dangerous. Due to the influence of the demon's illusion, they became arrows and got stuck in your body. 48-49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)