श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 50: विभीषण को इन्द्रजित समझकर वानरों का पलायन, गरुड़ का आना और श्रीराम लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त करके जाना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  6.50.40 
तेजो वीर्यं बलं चौज उत्साहश्च महागुणा:।
प्रदर्शनं च बुद्धिश्च स्मृतिश्च द्विगुणा तयो:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
उसकी प्रतिभा, साहस, बल, ओज, उत्साह, दूरदर्शिता, बुद्धि और स्मरण शक्ति जैसे महान गुण पहले से भी दुगुने हो गये।
 
His great qualities such as brilliance, courage, strength, vigour, enthusiasm, vision, intelligence and memory power became double than before. 40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)