vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 50: विभीषण को इन्द्रजित समझकर वानरों का पलायन, गरुड़ का आना और श्रीराम लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त करके जाना
»
श्लोक 40
श्लोक
6.50.40
तेजो वीर्यं बलं चौज उत्साहश्च महागुणा:।
प्रदर्शनं च बुद्धिश्च स्मृतिश्च द्विगुणा तयो:॥ ४०॥
अनुवाद
उसकी प्रतिभा, साहस, बल, ओज, उत्साह, दूरदर्शिता, बुद्धि और स्मरण शक्ति जैसे महान गुण पहले से भी दुगुने हो गये।
His great qualities such as brilliance, courage, strength, vigour, enthusiasm, vision, intelligence and memory power became double than before. 40.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×