श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 50: विभीषण को इन्द्रजित समझकर वानरों का पलायन, गरुड़ का आना और श्रीराम लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त करके जाना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.50.34 
महता पक्षवातेन सर्वद्वीपमहाद्रुमा:।
निपेतुर्भग्नविटपा: सलिले लवणाम्भसि॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
गरुड़ के पंखों से उत्पन्न तेज हवा ने पूरे द्वीप के सभी बड़े वृक्षों की शाखाओं को तोड़कर खारे समुद्र के पानी में गिरा दिया। 34.
 
The strong wind generated by Garuda's wings broke the branches of all the big trees of the entire island and dropped them into the water of the salty sea. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)