Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.50.3: ये दोनों दशरथ के वीर पुत्र रक्त से लथपथ बाणों की शय्या पर लेटे हुए हैं और बाणों की वर्षा से आच्छादित हो रहे हैं।॥3॥   |   ramayan सर्ग 6.50: विभीषण को इन्द्रजित समझकर वानरों का पलायन, गरुड़ का आना और श्रीराम लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त करके जाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 50: विभीषण को इन्द्रजित समझकर वानरों का पलायन, गरुड़ का आना और श्रीराम लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त करके जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.50.3 
शरजालाचितौ वीरावुभौ दशरथात्मजौ।
शरतल्पे महात्मानौ शयानौ रुधिरोक्षितौ॥ ३॥
 
 
अनुवाद
ये दोनों दशरथ के वीर पुत्र रक्त से लथपथ बाणों की शय्या पर लेटे हुए हैं और बाणों की वर्षा से आच्छादित हो रहे हैं।॥3॥
 
These two brave sons of Dasaratha are lying on a bed of arrows soaked in blood and are being covered with a hail of arrows.'॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)