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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 50: विभीषण को इन्द्रजित समझकर वानरों का पलायन, गरुड़ का आना और श्रीराम लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त करके जाना
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श्लोक 29
श्लोक
6.50.29
तान्यौषधान्यानयितुं क्षीरोदं यान्तु सागरम्।
जवेन वानरा: शीघ्रं सम्पातिपनसादय:॥ २९॥
अनुवाद
'मेरी राय है कि सम्पाती और पनस आदि वानरों को शीघ्र ही क्षीरसागर के तट पर जाकर उन औषधियों को ले आना चाहिए।
‘It is my opinion that the monkeys like Sampati and Panas should quickly go to the shore of the Kshirsagar to bring those medicines.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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