श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 50: विभीषण को इन्द्रजित समझकर वानरों का पलायन, गरुड़ का आना और श्रीराम लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त करके जाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.50.23 
तमेवं सान्त्वयित्वा तु समाश्वास्य तु राक्षसम्।
सुषेणं श्वशुरं पार्श्वे सुग्रीवस्तमुवाच ह॥ २३॥
 
 
अनुवाद
राक्षस विभीषण को सान्त्वना और आश्वासन देकर सुग्रीव ने पास खड़े अपने ससुर सुषेण से कहा- 23॥
 
After giving solace and assurance to the demon Vibhishana, Sugriva said to his father-in-law Sushen standing next to him - 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)