श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 50: विभीषण को इन्द्रजित समझकर वानरों का पलायन, गरुड़ का आना और श्रीराम लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त करके जाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.50.21 
राज्यं प्राप्स्यसि धर्मज्ञ लङ्कायां नेह संशय:।
रावण: सह पुत्रेण स्वकामं नेह लप्स्यते॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे धर्म के ज्ञाता! इसमें कोई संदेह नहीं है कि तुम्हें लंका का राज्य मिलेगा। रावण अपने पुत्र सहित यहाँ अपना मनोरथ पूरा नहीं कर सकेगा॥ 21॥
 
O knower of Dharma! There is no doubt that you will get the kingdom of Lanka. Ravan along with his son will not be able to fulfill his desire here.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)